हिन्दू धर्म का वैदिक साहित्य

वेद 

ऋग्वेद में 10 मंडल और 1028 श्लोक हैं। इसमें 10600  मन्त्र हैं। इस वेद में दशराज्ञ युद्ध का वर्णन किया गया है ये युद्ध रावी  नदी के तट पर हुआ था। सर्वप्रथम ब्राम्हण ,क्षत्रिय , वैश्य और शूद्र  का उल्लेख  इसी वेद में हुआ। 

युजर्वेद  कर्मकाण्ड  प्रधान ग्रन्थ है। इसमें हिन्दू धर्म में होने वाले कर्मकाण्डो  का विवरण है। 

सामवेद में गान  का विवरण है। साम  का अर्थ “गान  ” है 

अथर्वेद इस वेद में रोगनिवारण ,राजभक्ति ,विवाह, और अंधविश्वासों का वर्णन किया गया है। अथर्व शब्द का अर्थ पवित्र जादू होता है।

उपवेद

ऋगवेद -आयुर्वेद इस वेद में चिकत्साशास्त्र का वर्णन किया गया है।

यजुर्वेद -धनुर्वेद इसमें युद्धशास्त्र का भलीभाँति विवरण है।

सामवेद -गन्धर्ववेद इस वेद में संगीतशास्त्र का अध्यन किया जाता है।

अथर्ववेद -शिल्पवेद इस वेद में भवन निर्माण का विवरण हुआ है।

वेदांग

वेदो का अर्थ समझने के लिए वेदांग की रचना की गई इनकी संख्या 6 है

  1. शिक्षा
  2. शिल्प
  3. व्याकरण
  4. निरुक्त
  5. छन्द
  6. ज्योतिष

ब्राह्मण ग्रन्थ

प्रत्येक वेद की गद्य रचना ही ब्राह्मण ग्रन्थ है। इनकी भाषा वैदिक संस्कृत है। हर वेद का एक या एक से अधिक ब्राह्मणग्रन्थ है।

आरण्यक

आरण्यक शब्द अरण्य शब्द से बना हुआ है। अरण्य का मतलब जंगल होता है। इसमें जन्म -मृत्यु ,आत्मा -परमात्मा तथा पुनर्जन्म का उल्लेख भली-भाँति किया गया है। आरण्यक ज्ञान मार्ग और कर्म मार्ग के बीच सेतु का कार्य करता है।

उपनिषिद

इनको वेदान्त भी कहा जाता है, इनकी सँख्या 108 है। उपनिषद में प्राप्त विद्या मुख्य होती है। ये गुरु द्वारा दिया गया ज्ञान और शिक्षा से प्रेरित होता है। और जो मुख्य विद्या हमको गुरु के समीप बैठ कर एकांत में प्राप्त होती है। वो बहुत महत्वपूर्ण होती है जो उपनिषद का अर्थ है।

पुराण

मत्स्य पुराण सर्वाधिक प्राचीन है जिसमे विष्णु भगवान के सभी 10 अवतारों का वर्णन है।

विष्णु पुराण इसमें विष्णु भगवान का सम्पूर्ण उल्लेख है।

नारद पुराण एक वैष्णव पुराण है। इस पुराण को सुनने से अध्यन करने से पापी भी पाप मुक्त हो जाते हैं

वामन पुराण में मुख्यरूप से भगवान विष्णु का व्याख्यान है। ये भगवान विष्णु के वामन अवतार से प्रेरित है इसमें दस हजार श्लोक हैं।

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