Thalaivi Review: कंगना रणावत का शानदार अभिनय

बहुत दिनों बाद कंगना रणावत की एक फ़िल्म आई है जिसका नाम Thalaivi (थलाइवी) है जो एक बॉयोपिक है।साउथ की एक समय की बेह्तरीन अभिनेत्रियों में शुमार अभिनेत्री जय ललिता की बॉयोपिक में कंगना रणावत का शानदार अभिनय आपको देखने को मिलेगा।फ़िल्म के ट्रेलर ने ही बता दिया था ये फ़िल्म बहुत जबरदस्त होगी और हुआ भी कुछ वैसे।

कहानी: फिल्म की कहानी असेंबली के सीन से होती है जहाँ जयललिता के साथ अभद्रता हुई थी जिसके बाद जयललिता शपथ लेती हैं कि अब वे इस असेम्बली में मुख्यमंत्री या CM बनाकर ही आएंगी ये चुनौती देकर वो वँहा से चली जाती है ।दूसरे सीन में past की कहानी शुरू होती है कि कैसे वो स्कूल स्टूडेंट से अपनी माँ के कहने पर फिल्मो में आयी ,कैसे उनकी मुलाकात साउथ के उस समय के सुपरस्टार M. G.R से हुई।कैसे वो राजनीत में आयीं। साउथ सुपरस्टार एमजी रामचंद्रन (अरविंद स्वामी) के साथ जयललिता की प्रेम कहानी को बहुत सादगी से दर्शया गया है।

इंटरवल के बाद फ़िल्म जोर पकड़ती है जिसमें जयललिता के अम्मा बन कर उनके राजनीतिक जीवन मे होने वाले संघर्ष और शीर्ष तक पहुंचने में उनकी मेहनत को दर्शाया गया है। इस फ़िल्म में एक स्त्री के आत्मसम्मान और पुरुषवादी मानसिकता की सोच को दिखाया गया है।

जयललिता का कॉन्फिडेंस इतना ज्यादा था कि वे उस समय की प्रधानमंत्री रही इन्द्रा गाँधी तक को इम्प्रेस कर देती है और असेम्बली में तालियों की गूंज के साथ सभी उनका सम्मान करते नही थकते।पर्दे पर जयललिता जी के कैरेक्टर को दमदार तरीके से पेश किया गया है जिसमे कंगना रणावत ने पूरा-पूरा न्याय किया है।फ़िल्म देख कर आपको यही लगेगा कि इनके अलावा और कोई ये रोल नही कर सकता था ,या यूं कहें जयललिता का किरदार कंगना से बेहतर दूसरा नही कर पाता ।

रिव्यू:  तमिलनाडु की मुख्यमंत्री अम्मा कहलाने वाली जयललिता बहुत ही लोकप्रिय थी,उनके राजनीतिक करियर में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे और विवादों में भी खूब घिरी रहीं, पर इस बायॉपिक फ़िल्म में ये सब देखेने को नही मिलेगा क्योंकि फ़िल्म मेकर फ़िल्म बनाते समय वे विवादास्पद पहलुओं को दर्शाने से बचते हैं।

इस फ़िल्म में एमजीआर और जयललिता की लवस्टोरी तथा जयललिता जी के राजनीतिक करियर से उनके मुख्यमंत्री बनने तक के सफर को दिखाया गया है ।जिससे उन लोगो को निराशा हो सकती है जो ये सब पहले जे जानते होंगे वो ये सोच कर फ़िल्म देखें होंगे कि शायद निर्देशक उनपर लगे आरोपों को दर्शायेगा पर ऐसा निर्देशक ने नही किया ।

निर्देशक ने 80-90 के दशक को बखूबी दर्शाया है जैसे दिल्ली असेम्बली में आडवाणी जी अपना बोलने का समय भी जयललिता जी को दे देते हैं और ताली बजाने की पहल करते भी नजर आते हैं। राजनीतिक रैलियों और एमजीआर के निधन के वक्त भीड़ वाले दृश्य दमदार बन पड़े हैं। फिल्म में कंगना के किरदार को सशक्त बनाने के लिए निर्देशक ने कोई कमी नही छोड़ी है। फ़िल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक फ़िल्म के मुख्य सीनो में जान डाल देता है ।

ऐक्टिंग: निर्देशक विजय शायद ये जानते थे कि जयललिता का किरदार कंगना से बेहतर दूसरा नही कर पायेगा इसलिए उन्होंने कंगना को चुना ।उन्होंने लीजेंडरी जयललिता जी के चरित्र को पर्दे पर कंगना रणावत के द्वारा लार्जर दैन लाइफ के रूप में ही दिखाया है। अपने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए शेरनी की तरह दहाड़ती कँगना रणावत के अभिनय की प्रसंशा किये बिना दर्शक नही रह पाएंगे , किशोरी जया की अदाएं हो या एम जी आर की लवर हो या राजनीतिक किरदार ‘अम्मा’का रूप,हो हर पड़ाव को कंगना ने बखूबी से निभाया है।

एम जी आर के रोल में साउथ के स्टार अरविंद स्वामी ने बहुत अच्छा और संजीदा अभिनय किया है वे परदे पर एमजीआर को जीवंत करने में सफल हुए हैं।

इस फ़िल्म में कई नेगेटिव किरदार हैं जो आपको नजर आएंगे पर उस समय के एमजीआर के सहयोगी आर एम वी के किरदार में राज अर्जुन फिल्म के मुख्य किरदार न होते हुए भी मुख्य साबित हुए हैं जो पहले जयललिता जी के खिलाफ बाद में उनके साथ और मुख्यमंत्री तक की विजय यात्रा में उनका खास रोल है। राज अर्जुन का अभिनय फिल्म का प्लस पॉइंट है।

करुणानिधि की भूमिका में नासिर ने और कंगना की मां की भूमिका में भाग्यश्री ने अपनी भूमिका को खूबसूरती से निभाया है। मधु एमजीआर की पत्नी की छोटी-सी भूमिका में नजर आती हैं।

इस फ़िल्म को देखने से आपको जयललिता के जीवन के बारे में पता चलेगा ।और हाँ कँगना रणावत के फैंस के लिए जबरदस्त मनोरंजन वाली ये फ़िल्म है तो एक बार ये फ़िल्म जरूर देखें धन्यवाद ।

Leave a Comment

error: Content is protected !!