क्या होता है स्पाइवेयर?

स्पाइवेयर

स्पाइवेयर एक प्रकार का मैलवेयर है जो डिज़िटल डिवाइस जैसे- कंप्यूटर लैपटॉप, मोबाइल, टेबलेट से गुप्त एवं निजी जानकारियाँ चुरा सकता है।

यह मेल अकाउंट, बैंक डिटेल्स, सोशल मीडिया से लेकर टेक्स्ट मैसेज आदि पर नज़र रखता है एवं वहाँ से डेटा चोरी करके अपने ऑपरेटर तक पहुँचा सकता है।

यह ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ जुड़ा होता है।इन्हें इस तरह से डिज़ाइन किया जाता है कि डिवाइस यूज़र को डिवाइस में स्पाइवेयर के होने का पता न चल सके।

कई बार कंपनियाँ अपने कंप्यूटर सिस्टम में खुद स्पाइवेयर डलवाती हैं ताकि ये पता कर सकें कि कर्मचारी अपना काम सही तरीके से कर रहे हैं या नहीं।

स्पाइवेयर के प्रकार

ऐडवेयर– यह सामान्य प्रकार का स्पाइवेयर है जो मुख्य रूप से विज्ञापनदाताओं द्वारा उपयोग में लाया जाता है।

कुकी ट्रेकर– इसके ज़रिये किसी व्यक्ति की इंटरनेट गतिविधियों के बारे में जानकारी एकत्रित की जाती है।

सिस्टम मॉनीटर– इसका उपयोग डिवाइस की गतिविधियों पर नज़र रखने और डेटा रिकॉर्ड करने हेतु किया जाता है।

ट्रोज़न– इसे वास्तविक एप्लीकेशन, दस्तावेज़ या सॉफ्टवेयर के रूप में चित्रित किया जाता है।

इन्क्रिप्शन एवं डीक्रिप्शन

इन्क्रिप्शन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सूचना को ऐसे फॉर्म/कोड में बदल दिया जाता है जिसे समझना आम आदमी के लिये मुश्किल होता है।

जब हम इंटरनेट पर कोई संवेदनशील या महत्त्वपूर्ण सूचना सेव करते हैं तो हम उस सूचना को हैक होने से बचाने के लिये इन्क्रिप्ट कर देते हैं।

इन्क्रिप्शन उसे एक कूट भाषा या कोड में बदल देते हैं ताकि किसी अन्य व्यक्ति के पास पहुँचने पर भी सूचना को पढ़ा न जा सके।

डीक्रिप्शन की प्रक्रिया इन्क्रिप्शन के ठीक विपरीत होती है, जिसमें किसी इन्क्रिप्टेड या कोडेड फाइल/मैसेज को डी कोड कर उसे ऐसे फॉर्म में बदल दिया जाता है जो आम आदमी की समझ में आए।

स्पाइवेयर से बचाव

स्पाइवेयर की जासूसी से बचने के लिये कंप्यूटर एवं मोबाइल में एंटी स्पाइवेयर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने के साथ ही समय-समय पर इसे अपडेट करते रहें।

इंटरनेट पर कोई जानकारी सर्च करते समय केवल विश्वसनीय वेबसाइट पर ही क्लिक करें।

इंटरनेट बैंकिंग या किसी भी ज़रूरी अकाउंट को कार्य पूरा होने के पश्चात् लॉग आउट करें।तथा हिस्ट्री क्लियर करें ।

पासवर्ड टाइप करने के बाद ‘रिमेंबर’ पासवर्ड या ‘कीप लॉगइन’ जैसे ऑप्शन पर क्लिक न करें।

साइबर कैफे, ऑफिस या सार्वजनिक सिस्टम पर बैंकिंग लेन-देन न करें।

जन्मतिथि या अपने नाम जैसे साधारण पासवर्ड न बनाएँ, अल्फानुमरिक पासवर्ड बनाये जिसमें लेटर, नंबर और स्पेशल कैरेक्टर का मिश्रण रखें। 

सोशल मीडिया, e-Mail, बैंकिंग इत्यादि के पासवर्ड अलग-अलग रखें। बैंक के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।

बैंक की तरफ से आए किसी भी तरह के अलर्ट मेसेज को नज़रअंदाज़ न करें एवं डेबिट कार्ड का पिन नंबर नियमित अंतराल पर बदलते रहें।

इसके अलावा साइबर सुरक्षा के बारे में लोगों को जानकारी देने और साइबर अपराधों को कम करने के लिये दिशा-निर्देश तैयार किये गए है।

युवाओं विशेषतौर पर बच्चों के लिये गृह मंत्रालय द्वारा एक पुस्तिका जारी की गई है, जिसमें बच्चों को धमकी देना, सोशल साइट्स पर बहलाना-फुसलाना, ऑनलाइन गेमिंग, धोखाधड़ी, सोशल नेटवर्किंग के ज़रिये छेड़छाड़ से सुरक्षा के उपाय बताए गए हैं।

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