Psychological facts : Should know

हम लोगो की life में बहुत सी ऐसी बाते होती हैं, जिनपे हम अक्सर ध्यान नहीं देते हैं। पर वो बहुत असरदार होती हैं। अगर आप इनपे ध्यान दे तो आप लोगो की ज़हन में smart हो जाते हैं बस छोटी -छोटी बातो का ध्यान रखके हम स्मार्ट बन सकते हैं।

मनोविज्ञान में कुछ ऐसे तथ्य होते हैं होते जिनको आप जानकर हैरान रह जायेंगे क्योंकि ये Real Fact होते हैं ,मगर हम इनपर ध्यान नहीं देते। इस पोस्ट में आप कुछ ऐसे ही बातो और तथ्यों के बारे में जानेगें –

जिनको हम प्यार करते हैं ,जो हमको दिल से पसंद होता है और जिसकी हम परवाह करते हैं। वो अगर दुःखी होता है तो हम उससे ज्यादा परेशानहोते हैं। हम ये सोच-सोच के परेशान रहते हैं कि उसकी परेशानी उसका दर्द कैसे कम हो।

जब कोई हमसे बहस करता है तो इसका मतलब वो हमारी केयर करता है मनोविज्ञान तथ्य के अनुसार हम उसी से बहस करते हैं जिनसे हम प्यार करते हैं , क्योंकि हम नहीं चाहते कि वो गलत हो किसी भी बात पर। नोट – ये बात वकीलों की वक़ालत  और कोर्ट की बहस पर लागूनहीं होती।

अगर आप को कोई advice  दे या उसकी बात आपको अच्छी लगे तो उससे “आप / तुम ठीक कह रहे हो (you are right ) ये कहने की जगह आप उससे कहिये हाँ मैं जानता हूँ (Yes Know That )इससे आप बेहतर लगेंगे। हमेशा किसी भी बात या काम के लिएyes /हाँ का use नहीं करना चाहिए। नहीं या No  कहना भी सफलता का एक मानक है।

simple  सी बात है जब कोई हमको न कहता है तो उसकी चाहत हमको ज्यादा होती है। वो वाली बात है न ” जो हमको चाहिए ,उसको हम नहीं चाहिए और जिसको हम चाहिए, वो किसको चाहिए ” कहने का मतलब बिना संघर्ष किये कुछ भी मिल जाता है तो  उसकी value  हमें नहीं होती है । और जो न मिले उसके पीछे मन भागता है क्योंकि वो हमको न बोल  चुका होता है।  इसलिए कभी -कभी न(No ) बोलना भी अच्छा होता है। 

अकेलेपन की फीलिंग तब नहीं आती जब आप अकेले होते हो। बल्कि तब आती है जब आपके पास सब हो ,आप भीड़ में हो ,महफ़िल मे हो और  तब वो न हो जिसको आप जान से ज़्यादा प्यार करते हो अकेलेपन की फीलिंग तब होती है और बहुत ज्यादा होती है।

आप किसी के friend  बनके  प्यार  कर सकते हैं, मगर प्यार करके फिर से उसके friend  नहीं बन सकते।  

जब हम किसी से प्यार करते हैं तो हम उससे बस यही चाहने लगते हैं कि वो बस हमारे बारे में ही सोंचे , हमारी बात माने ,हमसे ही प्यार करे etc  ये ग़लत तो  है पर ये होता तभी है जब हमसे प्यार करने वाला हमसे ये कहता है कि मैं हर समय बस आपके बारे ही सोचता रहता हूँ या सोचती रहती हूँ ,मै  बस आप से ही प्यार करता हूँ या करती हूँ। और बात मानने वाली बात जब आप उससे ये कहोगे की  जो आप कहते हो वही तो करता हूँ या करती हूँ

कहने का मतलब प्यार में अति न करें,और करे तो मति  से (दिमाग़ )न करे। 

जब हम हंस रहे हो और अचानक चुप हो जाते हैं या निराश हो जाते हैं तो actually में हम किसी को मिस कर रहे होते हैं। 

किसी से जल्दी दोस्ती होना या प्यार होना ठीक नहीं है क्योंकि वो आप में अपना फ़ायदा  देखता है दोस्ती या प्यार नहीं। दोस्ती प्यार इतनी जल्दी नहीं होते क्योंकि ये दिल के रिश्ते होते हैं। ये बात तो आप ने सुनी ही होगी कि पहले जांचो परखो  फिर अमल  करो।

जब आप किसी से बात करें  तो थोड़ा मुस्करा के करें इससे सामने वाला polite  होके सम्मान दे कर बात करेगा। 

किसी से जलना या द्वेष रखना हमारे इम्यून सिस्टम के लिए हानिकारक है। 

अगर कोई कहे कि मै  बदल चूका हूँ तो ये बिलकुल ग़लत  है क्योंकि हम नहीं बदलते हमारे सामने के लोग व उनकी आयु बदल जाती है। और उनको लगता है की हम बदल गए। कुछ बाते  और व्यवहार हमारी  शारीरिक बनावट व उसकी क्षमता पे भी निर्भर करती हैं। 

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