Pegasus पेगासस हंगामा

पेगासस क्या है?

Pegasus एक ऐसा सॉफ़्टवेयर है, जिसे आपके डिवाइस की सभी एक्टिविटी को ट्रैक करने के लिए एक अटैकर द्वारा आपके स्मार्टफ़ोन पर इंस्टॉल किया जा सकता है. स्पाइवेयर मूल रूप से 2016 में सुर्खियों में आया था।

Pegasus स्पाइवेयर को क्यू सूट और ट्राइडेंट जैसे दूसरे नामों से भी जाना जाता है. स्पाइवेयर एपल के आईओएस में भी घुसपैठ कर सकता है।

भारत मे पेगासस हंगामा

संसद के मॉनसून सत्र से पहले फोन हैकिंग से जुड़ा मामला सामने आया है।अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में कई मंत्री व 40 से ज्यादा पत्रकारों के फोन हैक हुए हैं।विपक्ष ने सरकार को घेरा उनके तीखे सवाल तथा संसद में हंगामा हुआ है


विपक्ष का दावा है कि ये सरकार द्वारा करवाया गया, लेकिन केंद्र सरकार ने इन आरोपों को नकार दिया है।

क्या फोन हैकिंग का पूरा मामला?

रविवार रात को एक रिपोर्ट सामने आई, जिसमें दावा किया गया कि इज़रायल सॉफ्टवेयर Pegasus की मदद से भारत के करीब 300 लोगों के फोन हैक (Phone Hacking) किए गए।इनमें पत्रकार, मंत्री, नेता, बिजनेसमैन और अन्य सार्वजनिक जीवन से जुड़े हुए लोग शामिल हैं। ये रिपोर्ट वाशिंगटन पोस्ट समेत दुनिया की करीब 16 मीडिया कंपनी द्वारा पब्लिश की गई है।

विपक्ष का दावा है कि 2018 से 2019 के बीच अलग-अलग मौकों पर इन सभी पत्रकारों के फोन हैक किए गए ,इस दौरान व्हाट्सएप कॉल, फोन कॉल, रिकॉर्डिंग, लोकेशन समेत अन्य कई जानकारियां ली गई।

भारत सरकार ने अपने बयान में लिखा, ‘भारत जैसे लोकतंत्र में प्राइवेसी एक मौलिक अधिकार है।ऐसे में जो रिपोर्ट सामने आई है वह पूरी तरह से गलत है, रिपोर्ट को अपने अनुसार तैयार किया गया जिसमें जांचकर्ता-ज्यूरी सब वह खुद ही हैं। सरकार ने संसद में भी इस बारे में सफाई दी है कि ऐसी किसी भी तरह की गतिविधि में भारत सरकार संलिप्त नहीं है।

पेगासस स्पाइवेयर के बारे में

  • पेगासस एक स्पाइवेयर सॉफ्टवेयर है, जिसे इज़रायली साइबर सुरक्षा कंपनी NSO द्वारा विकसित किया गया है।
  • पेगासस स्पाइवेयर एक ऐसा सॉफ्टवेयर प्रोग्राम है जो उपयोगकर्त्ताओं के मोबाइल और कंप्यूटर से गोपनीय एवं व्यक्तिगत जानकारियाँ चोरी करता है एवं उन्हें नुकसान पहुँचाता है।
  • इस तरह की जासूसी के लिये पेगासस ऑपरेटर एक खास लिंक उपयोगकर्त्ताओं के पास भेजता है, जिस पर क्लिक करते ही यह स्पाइवेयर सॉफ्टवेयर उपयोगकर्त्ताओं की स्वीकृति के बिना स्वयं ही इंस्टाॅल हो जाता है।
  • इस स्पाइवेयर के नए संस्करण में लिंक की भी आवश्यकता नहीं होती, यह सिर्फ एक मिस्ड वीडियो काॅल के द्वारा ही इंस्टाॅल हो जाता है। पेगासस स्पाइवेयर इंस्टाॅल होने के बाद पेगासस ऑपरेटर को फोन से जुड़ी सारी जानकारियाँ प्राप्त हो जाती हैं।
  • पेगासस स्पाइवेयर की प्रमुख विशेषता यह है कि यह पासवर्ड द्वारा रक्षित उपकरणों को भी निशाना बना सकता है और यह मोबाइल के रोमिंग में होने पर डेटा नहीं भेजता।
  • पेगासस मोबाइल में संगृहीत सूचनाएँ, व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे कम्युनिकेशन एप के संदेश स्पाइवेयर ऑपरेटर को भेज सकता है।
  • यह स्पाइवेयर, उपकरण की कुल मेमोरी का 5% से भी कम प्रयोग करता है, जिससे प्रयोगकर्त्ता को इसके होने का आभास भी नहीं होता। पेगासस स्पाइवेयर ब्लैकबेरी, एंड्रॉयड, आईओएस (आईफोन) और सिंबियन-आधारित उपकरणों को प्रभावित कर सकता है।
  • पेगासस स्पाइवेयर ऑपरेशन पर पहली रिपोर्ट वर्ष 2016 में सामने आई, जब संयुक्त अरब अमीरात में एक मानवाधिकार कार्यकर्त्ता को उनके आईफोन 6 पर एक एसएमएस लिंक के साथ निशाना बनाया गया था ।

NSO ने कहा कि वह पेगासस की सेवाएँ केवल सरकारों और उनकी एजेंसियों को बेचते हैं। माना जाता है कि पेगासस दुनिया में सबसे परिष्कृत स्पाइवेयर में से एक है। ये ऑपरेटिंग सिस्टम में कमज़ोरियों को लक्षित करके स्पाइवेयर iOS और Android दोनों उपकरणों को हैक कर सकता है।

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