Jai Bhim Movie Review: जातिवाद ,भेदभाव और पुलिस सिस्टम पर ज़ोरदार तमाचा है फ़िल्म “जय भीम

हम चाहे जितना आगे बढ़ जाये ,कंही भी किसी भी क्षेत्र में पर हमारे देश मे जातिवाद जैसे घिनोनी मानसिकता कम नही हो पा रही है,जातिवाद ,भेदभाव तथा पुलिस की बर्बरता को उजागर करती फ़िल्म जय भीम को देखने पर आपको महसूस होगा कि एक इंसान दूसरे इंसान को कितना अधिक अपमानित तथा प्रताड़ित कर सकता है ।

 फ़िल्म जय भीम के लेखक और निर्देशक  टी. जे. ज्ञानवेल हैं।जिन्होंने बहुत अच्छी तरह से इस फ़िल्म को बनाया है इस फिल्म की सबसे खास बात निर्देशक की ही होगी जिनका, इसे पेश करने का अंदाज इतना सटीक और उम्दा है कि आप इस फिल्म से आज होने वाले बदलाव को महसूस कर पायेंगे।

इस फ़िल्म में साउथ के सुपरस्टार सूर्या ने एक बार फिर दर्शकों का दिल जीता है फ़िल्म में मणिकंदन और लीजोमोल जोस ने बहुत ही मार्मिक अभिनय किया है ।

कहानी

ये फ़िल्म 90 के दशक में तमिलनाडु की सच्ची घटना पर आधारित है जिसको निर्देशक ने बखूबी दिखाया है।फ़िल्म जय भीम कहानी राजकन्नू और सेंगगेनी की है जो  इरुलुर आदिवासी समुदाय में रहते हैं ।

फ़िल्म जेल के गेट के बाहर से शुरू होती है जँहा परिवार वाले जेल से छूटने वाले अपने सदस्य का इंतजार करते दिखाई देते हैं वंही पर कुछ पुलिस वाले भी होते हैं ,जेल से रिहा हो रहे लोगो को पुलिस वाले उनकी जाति के आधार पर अलग करते हैं फिर जो छोटी जाति के लोग होते हैं उनको दूसरे पुलिस वालों को पैसे लेकर दे देते है ,इस तरह का सौदा पुलिस वाले क्यों करते है ये जान कर आप हैरान हो जायेंगे कि वो पैसे लेकर छोटी जाति वालो को बिना किसी कसूर के दूसरे केसों में फसाने के लिए ये पुलिस वाले ये सब कर रहे हैं ये दृश्य आपको सोंचने तथा डराने पर मजबूर करेगा।

राजकन्नू और सेंगगेनी   इरुलुर आदिवासी हैं जो सांप पकड़ने व उसका जहर उतारने और मजदूरी करके अपना पेट पालते हैं वे एक खेत मे चूहे पकड़ रहे होते हैं खाने के लिए जी हां ,बारिश में मिट्ठी के बने घर की दीवार गिर जाती है ये सब निर्देशक ने बहुत संजीदगी से दिखाया है,ये आदिवासी इसमे भी अपना जीवन खुशियों से समझौता करके जी रहे हैं।

सरपंच के घर मे सांप पकने के लिए राजकुन्नू को बुलाया जाता है वो सांप पकड़ कर जंगल मे छोर देता है,दूसरे दिन राजकुन्नू अपने गांव से दूर ईंट के भट्टे पर काम करने के लिये चला जाता है,इधर सरपंच के घर चोरी हो जाती है जिसका इल्जाम राजकुन्नू पर लग जाता है।

अब पुलिस की बर्बरता दिखाई जाती है कि कैसे वो रात में राजकुन्नू के घर जाकर उसकी पगर्भवती पत्नी सेंगगेनी को मारता है तथा उसे घसीटते हुए पुलिस स्टेशन ले आता है ,बाद में पुलिस उसके बाकी रिश्तेदारों को भी पकड़ कर ले आती है और बहुत मारती है ,पुलिस स्टेशन के अंदर इतना अत्यचार देखकर कर आप बहुत दुखी हो जायेंगे ।

राजकुन्नू अपने घर आ रहा होता है तभी सरपंच के लोग पकड़ कर उसे मारते है और पुलिस के हवाले कर देते है ,पुलिस वाले राजकुन्नू को बहुत टार्चर करते हैं ,दूसरे दिन पुलिस बताती है कि राजकुन्नू और उसके 2 साथी पुलिस स्टेशन से फ़रार होते है। इसपर सेंगगेनी परेशान हो जाती है । फिर वो वकील चंद्रू (सूर्या)के पास पहुंच कर अपनी आपबीती सुनाती है ।वकील चंद्रू (सूर्या) सब कुछ जान समझ कर हैवियस कार्पोस में राजकुन्नू का केस फ़ाइल करता है।

अब आगे क्या होता ये जानने के लिए आप इस फ़िल्म को जरूर देखिये ,कि कैसे पुलिस वाले आदिवासी और छोटी जाति वाले लोगो पर अत्याचार करते हैं ,यँहा तक कि निर्देशक ने ये भी दिखा दिया कि पुलिस सिस्टम अपने गुनाहों को छुपाने के लिए किस हद तक जाती है ।

एक्टिंग

सूर्या ने एक बार फिर बहुत ही अच्छा काम किया ,उनका काम आपको बहुत पसंद आएगा यहाँ तक कि आप फ़िल्म को देखते समय उनके किरदार को दुआएं भी देंगे ।शत प्रतिशत ‘जय भीम’, सूर्या के करियर की सबसे अहम फिल्मों से एक फ़िल्म साबित होगी।

मणिकंदन ने राजकुन्नू के किरदार को पर्दे पर जीवंत कर दिया है उनका अभिनय सराहनीय है।

लीजोमोल जोस ने सेंगगेनी का किरदार किया है जो राजकुन्नू की पत्नी बनी है इनका अभिनय तो इतना रियल लगता है कि आप अपने आंसू नही रोक पाओगे।

प्रकाश राज फिल्मी पर्दे पर इनका सकरात्मक किरदार दर्शकों को पसंद आता है या फ़िल्म में बहुत अच्छा अभिनय किया है ।

तामिज़ फ़िल्म के मुख्य विलन बन जाते हैं जिन्होंने एक क्रूर इंस्पेक्टर का किरदार बहुत ही ब्रिलियंटली किया है इस किरदार को देखते ही आप इसको गाली देने लगोगे ,जोकि इनके अभिनय की तारीफ है।

अन्य कलाकारों का अभिनय भी बहुत सराहनीय है सभी ने क़िरदारों ने अभिनय करके किरदारों में जान डाल दी है।फिल्म में सिर्फ सुपरस्टार सूर्या पर ही नही बाकी क़िरदारों पर पूरा फोकस रहा है यँहा तक कि इसमें दिखाया गया है कि न्यायपालिका और पुलिस विभाग से लड़ना कितना मुश्किल है ,आम आदमी के बस की बात नही ,सिस्टम करप्ट , यँहा तक कि वकील भी करप्ट होते हैं। अच्छा वकील मिलना मुश्किल है जो पर्सनल होकर आपके केस को लड़े और न्याय दिलाने के लिये आपकी मदद करे।

कुल मिलाकर फ़िल्म बहुत ज्यादा अच्छी है आप इसे जरूर देखें।

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