Hum Do Hamare Do Movie Review: Rajkummar Rao की नई फिल्म

इस फ़िल्म में बेहतरीन स्टारकास्ट है कृति सैनन ,राजकुमार राव ,परेश रावल ,रत्ना पाठक पर कुछ जी हाँ के कुछ आपको हर जगह नज़र आएगा ।इस फ़िल्म को देखने के बाद आपको शायद यही लगे चलिए करते हैं इस फ़िल्म का रिव्यु ।

इस फ़िल्म को अभिषेक जैन  ने निर्देशित किया है ।

कहानी

इस फ़िल्म की कहानी शुरू होती है एक ढाबे से जिसके मालिक होते हैं पुरषोत्तम मिश्रा (परेश रावल ) जँहा दीप्ती कश्यप (रत्ना पाठक) अपने बच्चे वरुण को अपने पति के साथ खाना खिला रही होती हैं ।पुरषोत्तम उनको देखते -देखते अजय देवगन की फ़िल्म दिलवाले का गाना प्ले कर देता है ,जिससे ये पता चलता है कि पुरषोत्तम पहले से दीप्ति कश्यप को जानता है ।

एक अनाथ बच्चा उसी ढाबे पर वेटर होता है सर्व करते करते ।दीप्ती कश्यप उस बच्चे को अपने ओएस बुलाकर उसका नाम पूछती है तो वो अपना नाम बाल प्रेमी बताता है जिसपर दिप्ती उसे नाम बदलने की सलाह देकर बिल के  साथ टिप देकर वँहा से चली जाती है ।

फिर कहानी कुछ साल बाद दिखाई जाती है जँहा एक पार्टी में ध्रुव राजकुमार राव की एंट्री होती है जो एक सक्सेस बिज़नेस मैन की तरह एंट्री लेते हैं ,उसी पार्टी में आन्या (कृति सैनन ) भी मौजूद होती है ,ओबीवेसली दोनों का इंटरेक्शन सीन है,उसके बाद दोनों कक मुलाकाते फिर प्यार ,फिर बात आती है शादी की ।जँहा आन्या उसी लड़के से शादी करना चाहती हैं जिसके फैमिली हो क्योंकि वो अपनी फैमली बचपन मे खो चुकी होती हैं ।इसपर अपने ध्रुव जो कि अनाथ होता है कृति को झूठ बोल चुका होता कि उसकी फैमिली होती है जबकि ध्रुव होता अनाथ है ।

अब इस बात को सच करने के लिए ध्रुव नकली माँ- बाप के रूप में पुरषोत्तम मिश्रा तथा दीप्ती कश्यप को आन्या की फैमिली से मिलाता है।

अब आगे क्या होता है इसे जानने के लिए आप फ़िल्म देखें।

ऐक्टिंग

सबने अच्छे से अपना अपना रोल किया है ,चूंकि सभी कलाकार बेहतरीन हैं तो उन्होंने उतना ही किया जितना डाइरेक्टर ने कहा।अपनी तरफ से कंही अभिनय में इम्प्रोवाइजेशन का मौका न ही दिया गया न ही किसी ने किया।

एक कहानी में कई कहानी हैं वो भी अधूरी या यूं कहें आधी -आधी

कृति सैनन ,राजकुमार राव की रोमांटिक कहानी भी अधूरी ही लगती है जो एक स्टेज पर आकर शुरू होते ही खत्म हो जाती है या यूं कहें एक गाने में ही इनकी रोमांटिक कहानी को खत्म करके आगे बढ़ते दिखाया गया है ।

परेश रावल और रत्ना पाठक की कहानी को सही से डिस्क्राइब नही किया गया।

बाकी one time वॉच मूवी कह सकते हैं पर फ़िल्म में देखने के लिए कुछ नया नही है ,आपको फ़िल्म बोर कर सकती है ।

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