BellBottom Akshay Kumar Movie Review

फिल्म बेलबोटॉम की कहानी सच्ची घटनाओं से प्रेरित है ,इस फिल्म की कहानी में एक रॉ ऐजेंट है , जिसे हम एक ऐसा हीरो समझते है कि इसके आते ही सब ठीक हो जायेगा ,और होता भी कुछ वैसे ही है हीरो की जांबाजी, सूझ-बूझ और साहस से हाइजेक हुए एक प्लेन के न केवल यात्रीओं को बचा लिया जाता है बल्कि उस प्लेन को अगवा करने वाले आतंकवादियों को भी पकड़ लिया जाता है।

ये फिल्म अस्सी के दशक की है, जब देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी हुआ करती थीं। इस फिल्म को देखने के बाद आपको ये पता चलेगा कि इस दौर में कितने प्लैन हाईजैक हो जाते थे। जब देश एक के बाद एक करके लगातार कई हाइजेक्स होने लगे तब इसे रोकने के लिए RAW एक प्लान बनाती है, इसी घटना को फिल्म के डॉयरेक्टर ने बहुत अच्छी तरीके से दिखाया है ।

इस फिल्म के माध्यम से हम जानते है कि प्लेन हाईजैक में पाकिस्तान के इंटेलिजेंस ISI का हाँथ है फिल्म में अक्षय कुमार की भूमिका ISI का पर्दाफाश करेगा।

अक्षय कुमार अपनी तमाम खूबियों की वजह से जाने जाते है इस फिल्म को देखते हुए आपको कभी-कभी लगेगा कि आप फिल्म BABY या नाम शाबना मूवी देख रहें हैं।हूमा क़ुरेशी का जबरदस्त सस्पेंस वाला रोल आपका रोमांचित करेगा। डॉयरेक्टर ने सभी कलाकारों को अपनी कहानी में खूबसूरती से पिरोया है । फिल्म का फर्स्ट हाफ थोड़ा स्लो है, पर सेकंड हाफ में कहानी एकदम जबदस्त तरीके से आगे बढ़ती है आपको सीट से हटने का मौका नहीं देती है । फिल्म में कई टर्न और ट्विस्ट हैं, जो दर्शकों के दिमाग़ को बांधे रखते हैं। परवेज शेख औरअसीम अरोरा के डायलॉग आपको बेहतर तरीके तथा बद्धिमता से हँसने पर जोर देते दिखाई पड़ेंगे ।

फिल्म की एडिटिंग सटीकता दर्शाती है डायरेक्टर ने 80 के दशक को बेहतर तरीके से दिखाने का प्रयास किया है जिसमे वे काफी हद तक सफल रहें । बैकग्रॉउंड स्कोर फिल्म का प्लस पॉइंट है। फिल्म में तनिष्क बागची, अमान मलिक और गुरमाजर सिंह का संगीत है, एक्शन-थ्रिलर में संगीत पक्ष मजबूत नहीं होता,ये कमी खल सकती है, पर लोग इसके विषय को ध्यान में रखकर मूवी देखने जायेंगे जो कि महत्वपूर्ण है।

अक्षय कुमार एक मंझे हुए अभिनेता है और इनकी देशभक्ति वाली फिल्मे इनको और निखार देती हैं। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की भूमिका में लारा दत्ता फिल्म का सरप्राइज हैं , अगर आपको पता न हो पहले से तो आप गेस नहीं कर पाओगे कि ये अभिनेत्री कौन है, इसका पूरा श्रेय मेकप टीम को जाता है । वाणी कपूर को ज्यादा स्पेस नहीं दिया गया पर फिल्म ख़त्म होते-होते उनका किरदार कितना अहम् है ये डॉयरेक्टर ने हमको बताने में कतई संकोच नहीं किया,आप भी यही कहोगे ये न होती तो शायद फिल्म का हीरो ,हीरो न होता।खैर एक्शन ,थ्रिलर ,सस्पेंस और ट्विस्टों से भरी ये फिल्म आप जरूर देखें। धन्यवाद

जय हिन्द । जय भारत । वन्दे मातरम

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